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उत्कृष्टता के 59 वर्षः भा.प्रौ.सं मुंबई ने स्थापना दिवस मनाया।

10 Mar 2018

संस्थान ने विशिष्ट स्मरणीय डाक टिकट, हीरक जयंती 'लोगो’(प्रतीक चिह्न) को जारी किया एवं नए अतिथिगृह पद्मविहार के नामपट्टिका का अनावरण किया।10 लोगों ने विशिष्ट भूतपूर्व छात्र सम्मान प्राप्त किया।2 लोग युवा भूतपूर्व छात्र विजेता पुरस्कार से सम्मानित।3 संकाय सदस्यों को अनुसंधान कार्य में, उत्कृष्टता पुरस्कार से पुरस्कृत।आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई ने 59वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस अंतर्राष्ट्रीय महत्वप्राप्त संस्थान का शिलान्यास 10 मार्च 1959 को तत्कालीन प्रधानमंत्री, पं.जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया था। भा.प्रौ.सं मुंबई देश में स्थापित होने वाला द्वितीय भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान था और यूनेस्को से प्राप्त सहयोग के कारण विदेशी सहायता से संस्थापित होनेवाला प्रथम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान था। तब से लेकर यह संस्थान निरंतर प्रगति के सोपान चढ़ता गया और आज यह दुनिया के अभियांत्रिकी संस्थानों में श्रेष्ठ माना जाता है।समारोह का शुभारंभ भा.प्रौ.सं मुंबई के निदेशक, प्रा. देवांग खख्खर के स्वागत भाषण, जिसमें 59 वर्षों में प्राप्त महान उपलब्धियों पर प्रकाश डालने और हीरक जयंती वर्ष (10 मार्च 2018 से 10 मार्च 2019) के शुभारंभ की घोषणा वाले व्याख्यान से हुआ। अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा, "संस्थान में सबसे बड़ा परिवर्तन विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों द्वारा विशेष क्षेत्र के लिए काम करते हुए बहुविषयक केंद्रों का निर्माण करने की परंपरा को बनाना है। मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमने नए सुपर कम्प्यूटर "स्पेस टाइम" के लिए निर्देश प्राप्त किए है, जो हमारे कम्प्यूटर क्षमता निर्माण में एक उल्लेखनीय उपलब्धि होगी।" उन्होंने बढ़ते औद्योगिक संपर्क, अंतर्राष्ट्रीय संबद्धता, उद्यमशीलता एवं भूतपूर्व छात्र संपर्क पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर, कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि, महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री.चेन्नामनेनी विद्यासागर राव ने डॉ. अनिल काकोड़कर, पूर्व अध्यक्ष, शासी मंडल, भा.प्रौ.सं मुंबई जैसे गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में नए अतिथिगृह पद्मविहार के नामपट्टिका का अनावरण किया।हीरक जयंती वर्ष के समारोह का शुभारंभ प्रमुख अतिथि श्री. चे.विद्यासागर राव द्वारा संस्थान के डाक टिकट एवं हीरक जयंती लोगो को जारी करने के साथ हुआ। अपने उद्घाटन भाषण में श्री.चे.विद्यासागर राव ने संबोधित करते हुए कहा, "मेक इन इंडिया की तरह हमारे संस्थानों के श्रेष्ठ संकाय सदस्यों के साथ हमें 'टीच इन इंडिया' को कार्यान्वित करना चाहिए।"भा.प्रौ.सं मुंबई को भारत के ताज का असली हीरा कहते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि संस्थान को अपने कार्यस्वरूप की रुपरेखा बनाना चाहिए। बहुत दिनों से भारत के लिए एक नोबेल पुरस्कार का इंतजार है, यदि कोई संस्थान यह पुरस्कार भारत के लिए ला सकता है, तो वह भा.प्रौ.सं मुंबई है। यह आवश्यक है कि अनुसंधान के लिए निधि एवं विद्यार्थियों के लिए निधि आवश्यक रूप से बढ़ाई जाए। भा.प्रौ.सं मुंबई को एक गतिशील पहल करने वाले परिवेश केंद्र के रुप में उभरने की सुविधा एवं अवसर हैं।संस्थान ने आज विभिन्न क्षेत्रों जैसे शिक्षा, अनुसंधान एवं उद्यमशीलता के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने वाले, चयनित भूतपूर्व छात्रों के सम्मान के द्वारा अपना 59वां वार्षिकोत्सव मनाया। प्रा. एस.सी.भट्टाचार्य विशुद्ध विज्ञान में उत्कृष्ट अनुसंधान पुरस्कार एवं प्रा. एच.एच.माथुर अनुप्रयुक्त विज्ञान में उत्कृष्टता पुरस्कार, श्री. विद्यासागर राव, डॉ. अनिल काकोड़कर, पूर्व अध्यक्ष, शासी मंडल, भा.प्रौ.सं मुंबई द्वारा समारोह में विशिष्ट भूतपूर्व छात्र पुरस्कार एवं युवा भूतपूर्व छात्र विजेता पुरस्कारों से सम्मानित भूतपूर्व छात्रों को विशिष्ट अतिथि का सम्मान दिया गया।संस्थान भा.प्रौ.सं मुंबई के भूतपूर्व छात्रों को, जिन्होंने अपने विशेषज्ञता के क्षेत्रों में संस्थान का नाम रोशन किया है, उनको हमेशा से उल्लेखनीय मानता रहा है। इस अभिप्राय के लिए संस्थान ने विशिष्ट भूतपूर्व छात्र पुरस्कार (डीएए) की स्थापना की है। इस वर्ष पुरस्कारप्राप्तों में निम्नांकित नाम शामिल हैं:-श्री. रामेश्वर कुमार मैनीश्री. जयंत दामोदर पाटीलप्रा. सुबोध जी. म्हैसलकरप्रा. प्रवीण कुमारडॉ. टी.वी.रमनसुश्री. शालिनी गोविल पैडॉ. किशोर सेंद्रिपुप्रा. गीता नारळीकरप्रा. विराल आचार्यश्री. नितेश तिवारीप्रा. एस.सी.भट्टाचार्य शुद्ध विज्ञान में उत्कृष्टता अनुसंधान पुरस्कार, प्रा. कृष्ण पी.कालिअप्पन, रसायनशास्त्र विज्ञान विभाग को प्रदान किया गया। प्रा. एच.एच.माथुर अनुप्रयुक्त विज्ञान में उत्कृष्टता पुरस्कार प्रा. अमित अग्रवाल एवं प्रा. बी.रवि, यांत्रिकी अभियांत्रिकी विभाग को प्रदान किय गया।युवा भूतपूर्व छात्र विजेता पुरस्कार उन भूतपूर्व छात्रों को दिया गया जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है और जो 40 वर्ष से कम उम्र के हैं। संस्थान में इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2011 में किया गया। इस वर्ष के पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में शामिल हैं:-श्री. विभोर गोयल एवं श्री. हरप्रीत सिंह ग्रोवरश्री. निशांत पटनीपुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए, पूर्व अध्यक्ष, शासी मंडल, भा.प्रौ.सं मुंबई, डॉ. अनिल काकोड़कर ने कहा, "भा.प्रौ.सं मुंबई को अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास एवं नवाचार के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।"भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई के विद्यार्थियों ने 9 मार्च, 2018 को भा.प्रौ.स. मुंबई की हीरक जयंती की पूर्व संध्या पर 'राग दर्शन' कार्यक्रम आयोजित किया 'रागदर्शन' एक संगीतमय संध्या  जिसमें  महान संगीतज्ञ पद्मश्री प. अजोय चक्रवर्ती एवं उनके शिष्य श्री पूर्बयन चटर्जी (सितार पर)  श्री कौस्तव कांति गांगुली (स्वर) प. योगेश साम्सी (तबला पर ) एवं श्री अजय जोगलेकर (हार्मोनियम पर) शामिल थे।नए अतिथि गृह पद्मविहार के विषय मेंपद्मविहार भा.प्रौ.सं. मुंबई का नया  अतिथि गृह है। इसमें 88 ट्वीन रूम हैं और 48 सुइट रूम हैं। इसमें लगभग 280 अतिथियों के लिए बड़ा सा भोजन कक्ष है, आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित रसोई है, लघु भोजन कक्ष है एवं पूर्व छात्र विश्रांतिका है। हरित पहल के रूप में इसे जल शोधन के लिए धूसरा पानी की टंकी एवं सौर जल ताप प्रणाली से सुसज्जित किया गया है।संस्थान के डाक टिकट के विषय में'मेरा टिकट'  भारतीय डाक के व्यक्तिगत डाक टिकट पत्रक को व्यक्तिगत नाम देने वाला एक ब्रांड है। इस डाक टिकट पत्रक में 12 टिकट होते हैं। इसमे संस्थान के मुख्य भवन की दो तस्वीरें है, जो संस्थान की ऐतिहासिक पहचान को दर्शाती हैं। इस पत्रक की पृष्ठभूमि में पवई झील के साथ संस्थान का हवाई दृश्य  दिया गया है।हीरक जयंती लोगो (प्रतीक-चिह्न) के विषय मेंज्ञान के प्रतीक एवं परिष्कार के भाव को व्यक्त करने के लिए हीरक जयंती समारोह लोगो (प्रतीक-चिह्न) के लिए एक बहुत ही  सूक्ष्म एवं प्रभावशाली अवधारणात्मक एंबी ग्राम का उपयोग किया गया। इस वृत्त के प्रतीक '60' को दर्शाते हैं जबकि समेकित शब्द 'बॉम्बे' को अभिव्यक्त करते हैं।हालंकि दूसरा असर जो अपूर्ण है पास आकर देखने पर यह आकार पूरा दिखता है जो इसे अविस्मरणीय बनाता है।शुरुआत में वृत्तीय घटक और "इमर्जिग सर्किल्स" प्रौद्योगिकीय उन्नतशीलता को दर्शाता है और इससे  समारोह की भव्यता बढ़ जाती है।'नारंगी' रंग का इस्तेमाल सूर्योदय के लिए किया गया है। जो रचनात्मकता एवं निर्णय लेने की क्षमता को अभिव्यक्त करता है परिष्करण को अभिव्यक्त करने  के लिए दूसरे रंग का प्रयोग किया गया है।किसी विश्व विद्यालय में आवश्यक समझ के उपयोग की व्यवहारिकता उसके टैगलाइन से प्रति बिंबित होती है जो है - "साथ मिलकर उत्कृष्टता प्राप्ति"।इस लोगो का अभिकल्पन श्री शशिधर रेड्डी, भूतपूर्व छात्र, औद्योगिक अभिकल्प केंद्र, भा.प्रौ.सं. मुंबई द्वारा एवं टैगलाइन 'साथ मिलकर उत्कृष्टता प्राप्ति' का अभिकल्पन श्री विक्रांत राज, भूतपूर्व छात्र रासायनिक अभियांत्रिकी, भा.प्रौ.सं. मुंबई द्वारा किया गया है।                                                                                                भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई के हीरक जयंती समारोह के विषय मेंभा.प्रौ.सं. मुंबई के हीरक जयंती समारोह के लिए कई कार्यक्रम एवं क्रियाकलापों की योजना की गई है। इस प्रमुख कार्यक्रमों में स्थापना दिवस का विशिष्ट हीरक जयंती समारोह शामिल है जो अन्य कार्यक्रमों को गति देगा। इसके साथ अभ्य उच्च स्तरीय विशिष्ट कार्यक्रमों में अगस्त में 2018 में आयोजित होने वाला दीक्षांत समारोह है, जिसमें  प्रधानमंत्री के आने की संभावना है।इस कार्यक्रमों में कुलपति/ विश्वविद्यालय के अध्यक्षों की सभाओं / समझौता ज्ञापन साझेदारी एवं उद्योग एवं सरकार के नेताओं के साथ बैठकें भी होंगी। आंतरिक रूप से भा.प्रौ.सं. मुंबई के शैक्षिक विभागीय इकाइयां एवं विभाग अपने संबंधित क्षेत्रों विशेषतौर पर भा.प्रौ.सं. मुंबई के बनाए नए रणनीति दस्तावेज के अनुसार शिक्षा एवं अनुसंधान के वर्तमान एवं भविष्य पर संगोष्ठियां आयोजित कराएगे। भा.प्रौ.सं. मुंबई  भारत के चार शहरों एवं भारत के बाहर जैसे स.रा.अ. सिंगापुर आदि, जहाँ भा.प्रौ.सं. मुंबई के पूर्वछात्र रहते हैं एवं कार्य करते हैं, भा.प्रौ.सं. मुंबई अपने उन पूर्वछात्रों के साथ संपर्क करेगा एवं विभिन्न प्रकार की योजनाओं पर चर्चा करेगा। भा.प्रौ.सं. मुंबई को सार्वजनिक एवं सामाजिक क्षेत्र में स्थापित करने के लिए चर्चा हेतु कार्यक्रम बनाए गए हैं। कई आंतरिक मूलभूत सुविधाओं और नए और शीघ्र कार्यवाही सुविधा वाले प्रौद्योगिकी निदर्शक परियोजनाओं की योजना  की गयी है एवं उनका परिसरवासियों को लाभदायी, जिसमें शिशु सदन एवं एक नया समुदाय केन्द्र  एवं कला स्थापना शामिल करने की कोशिश की गई। भा.प्रौ.सं मुंबई में गत 60 वर्षों से आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव के मूल्यांकन का अध्ययन करने के लिए एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा। एक वर्ष तक चलने वाले इस समारोह का स्थापना दिवस, 10 मार्च 2019 को समापन होगा।